✍🏻 नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
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🌿 प्रस्तावना
यदि आप आज भी जैन हैं… तो यह कोई साधारण बात नहीं। यह कोई मात्र संयोग नहीं, कोई संप्रदायगत पहचान नहीं, बल्कि यह उस अद्भुत विरासत की गूंज है, जिसे जीवित रखने के लिए हमारे पूर्वजों ने सदियों तक लहू बहाया, अपमान सहा, बहिष्कार झेले, पर धर्म से डिगे नहीं। यदि आज आपके घर में प्रतिदिन आरती होती है, आराधना होती है, और बच्चों के कानों में “णमो अरिहंताणं” का स्वर गूंजता है, तो याद रखिए — यह आपके पुरखों के त्याग, तपस्या और अटूट आस्था की अमूल्य थाती है।
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🕯️ इतिहास रक्तरंजित है, पर गर्व से भरा है
जैन धर्म कोई instant religion नहीं है जो कल किसी ने सोचा और बना दिया। यह उस समय से चला आ रहा है जब मानव ने पहली बार आत्मा और कर्म का विचार किया। भगवन ऋषभदेव से लेकर महावीर स्वामी तक, और उनके पश्चात अनेक आचार्यों, गणधरों, मुनियों और श्रावकों ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर इस धर्म को आगे पहुँचाया।
क्या आप जानते हैं?
जब विदेशी आक्रमणकारी भारत आए, तो उन्होंने सबसे पहले जिस धर्म पर प्रहार किया — वह जैन धर्म था। क्योंकि जैन मुनि सत्ता के समक्ष नहीं झुकते थे। वे तलवार की नोक पर भी “मुझे मार दो, पर मैं अहिंसा नहीं छोड़ूंगा” कहते थे।
• सैंकड़ों मुनियों को जीवित जला दिया गया।
• हजारों श्रावकों को बलात धर्मपरिवर्तन की धमकी दी गई।
• मंदिरों को तोड़ा गया, मूर्तियाँ खंडित की गईं।
लेकिन फिर भी — हमारे पुरखों ने धर्म नहीं छोड़ा। यही है जैन धर्म की असली शान।
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🔥 अत्याचार के बीच भी दीया जलता रहा
इतिहास में ऐसे भी दौर आए जब जैन होना अपराध समझा जाता था। गाँवों से बहिष्कृत कर दिया गया। व्यापार पर रोक लगी। फिर भी लोग मंदिर गए, प्रतिक्रमण किया, उपवास किए, दीक्षा ली, और अपने बच्चों को धर्म का बीज बोया।
कभी स्त्रियों ने अपने गहने गिरवी रखकर मंदिरों की रक्षा की।
कभी बेटों ने तलवारें उठाईं, लेकिन झूठ नहीं बोला।
कभी entire परिवार ने मृत्यु को गले लगा लिया — पर धर्म से समझौता नहीं किया।
यह धर्म शास्त्रों में नहीं, हृदय में जिया गया है।
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🪔 अगर आप आज भी जैन हैं…
तो सोचिए — आप उस वंश के उत्तराधिकारी हैं, जिसने—
• जलते हुए लोहे पर चलकर भी “णमोकार मंत्र” नहीं छोड़ा।
• तलवार की धार पर भी क्षमा माँगी, पर बदला नहीं लिया।
• राजा का क्रोध सहा, लेकिन धर्म की परिभाषा नहीं बदली।
आपके पूर्वजों ने आपके लिए यह व्रत, यह पूजा, यह स्वाध्याय, यह संयम… सब कुछ बचाकर रखा।
आज आप संघ यात्रा, तीर्थ दर्शन, चातुर्मास, समवशरण, शुद्ध भोजन, आर्यिका माँ, श्रमण संस्कृति — ये सब पा रहे हैं क्योंकि किसी ने इसे छोड़ने से इनकार कर दिया था।
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📜 यह धर्म आपके नाम पर एक ऋण है
ध्यान रखिए — जैन धर्म हमें विरासत में नहीं मिला, यह हमें उत्तरदायित्व के रूप में मिला है।
यह केवल आरती करने या चरण वंदना तक सीमित नहीं है।
यह एक मिशन है — स्वयं को जानने का, समाज को सजग करने का, और आने वाली पीढ़ियों को तैयार करने का।
अगर आप जैन हैं — तो आपको सिर्फ गर्व नहीं, कर्तव्य भी महसूस होना चाहिए।
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🔔 अब हमें क्या करना है?
आज जब आधुनिकता के नाम पर धर्म का उपहास उड़ाया जा रहा है, तो हमारा कर्तव्य और बढ़ जाता है:
1. अपने बच्चों को जैन धर्म का वास्तविक ज्ञान दें — सिर्फ कथा नहीं, कारण भी।
2. धर्म को दिखावे का माध्यम न बनाएं, बल्कि आचरण का आधार बनाएं।
3. मुनियों की सेवा करें, पर अंधभक्ति से नहीं, विवेक से।
4. जैन ग्रंथों का स्वाध्याय करें, अपने विश्वास को तर्क से मजबूत करें।
5. आने वाली पीढ़ियों को बताएं कि धर्म कोई बोझ नहीं — बल्कि गौरव है।
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🌸 समापन
यदि आप अब भी जैन हैं, तो स्वयं पर गर्व करिए।
क्योंकि आपको जैन बनाये रखने के लिए आपके पूर्वजों ने अपने जीवन की सर्वोच्च आहुति दी है।
यह धर्म लहू से सींचा गया है, तप से तपा है, क्षमा से महका है।
इतिहास से प्रेरणा लीजिए, और भविष्य के लिए तैयार हो जाइए —
क्योंकि अब आपकी परीक्षा है।
अब आपको यह तय करना है —
कि आप सिर्फ जैन कहने वाले बनेंगे,
या जैन धर्म को जीने वाले भी।
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🌼 जय जिनेन्द्र
🌼 जय अहिंसा
🌼 जय श्रमण संस्कृति