जिनागम  |  धर्मसार

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शान्तिधारा पर आगम पृच्छा

🍁प्रश्न : एक बार शान्तिधारा पूर्ण हो जानेके बाद अभिषेक कर सकते हैं ? यदि हाँ, तो क्यों ? 🌻उत्तर :– इसका उत्तर सरल है ।शान्तिधारा श्रीजी की आराधना का…

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संजमणमेव संजम जो सो खलु हवइ समत्ताणुभाइ ।णिच्छयेण णियाणुभव ववहारेण पचेंदियणिरोहो ।।

संयमन ही संयम है जो निश्चित ही सम्यक्त्व का अनुभावी होता है । निश्चयनय से निजानुभव और व्यवहार से पंचेन्द्रिय निरोध संयम कहलाता है । संयमन को संयम कहते हैं…

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आज़ादी के हीरो – मेरे छोटे दादू; सुरेश जैन

आजादी के बलिदान की पटकथा यूपी की बिलारी तहसील के ग्राम हरियाना के बिना अधूरी है, क्योंकि मेरे छोटे दादू श्री केशव सरन जैन की स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय भूमिका…

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गर्व से कहो हम जैन है- जैन संदर्भ: एक परिचय

मित्रो! भले ही जैन समुदाय एक अल्पसंख्यक समुदाय है तथापि इस की उपलब्धियां किसी से कम नहीं है। आप अपने अतीत के शानदार इतिहास पर गर्व महसूस कर सकें एवं…

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विश्व मैत्री उद्घोषक भगवान महावीर स्वामी

विश्व मैत्री भावना के उद्घोषक सनातन श्रमण संस्कृति में चौबीस तीर्थंकर भगवंत हुए है। जब – जब सृष्टि पर धर्म की ही हानि होती है , अज्ञान- अविद्या के वश…

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जिन प्रभु का अतिशय

चोर कहीं भी ले जाए, प्रतिमा वापस मन्दिर जी में लौट आए दो से तीन बार चोरी हुई प्रतिमा को वापस मंदिर जी में गए चोर इस धरा पर कई…

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लोभ को त्यागकर मन की पवित्रता से नाता जोड़िए-मन निर्लोभी, तन निरोगी

  उत्तम शौच धर्म ‘शुचेर्भाव: शौचम’ परिणामों की पवित्रता को शौच कहते हैं। यह परिणाम की पवित्रता अलोभ से आती है। क्षमा से क्रोध पर, मार्दव से मान पर, आर्जव…

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