- 24/08/2020
- By- जिनागम - धर्मसार
अन्तर्मना उवाच
· माणं विणयं नासणो-मान विनय का नाश करती है। · उत्तम मार्दव यानि मार दो ,मै और मेरे अहंकार को। भक्त और भगवान के बीच की दीवार है अहंकार ।अहंकार…
Read More- 23/08/2020
- By- जिनागम - धर्मसार
क्षमा फूल है कांटा नहीं, क्षमा प्यार है चांटा नहीं: उत्तम क्षमा
उत्तम क्षमा धर्म – क्ष= पृथ्वी / पृथ्वी जैसे सहन करती है, उसी प्रकार समता स्वभाव से दूसरों के क्रोध को सहन करना क्षमा धर्म है। क्ष= नष्ट होना, मा=…
Read More- 06/04/2020
- By- जिनागम - धर्मसार
अहिंसा महावीर जी की दृष्टि में क्या है
124AhinsaMahavirKiDharsti
Read More- 09/03/2020
- By- जिनागम - धर्मसार
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओ को समर्पित एक सुंदर प्रेरक रचना
जो नारी तीर्थंकर प्रभु ; को अगर जनम दे सकती है … वो नारी अभिषेक प्रभु का ; कैसे ना कर सकती है … आज काल की विडंबना से…
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