जिनागम  |  धर्मसार

जिनवाणी

अन्तर्मना उवाच

·         माणं विणयं नासणो-मान विनय का नाश करती है। ·         उत्तम मार्दव  यानि मार दो ,मै और मेरे अहंकार को। भक्त और भगवान के बीच की दीवार है अहंकार ।अहंकार…

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क्षमा फूल है कांटा नहीं, क्षमा प्यार है चांटा नहीं: उत्तम क्षमा

उत्तम क्षमा धर्म – क्ष= पृथ्वी / पृथ्वी जैसे सहन करती है, उसी प्रकार समता स्वभाव से दूसरों के क्रोध को सहन करना क्षमा धर्म है। क्ष= नष्ट होना, मा=…

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चौबीस तीर्थकर

चौबीस-तीर्थंकर-भाग-२

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अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओ को समर्पित एक सुंदर प्रेरक रचना

जो नारी तीर्थंकर प्रभु ; को अगर जनम दे सकती है … वो नारी अभिषेक प्रभु का ; कैसे ना कर सकती है …   आज काल की विडंबना से…

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