जिनागम  |  धर्मसार

By- जिनागम - धर्मसार

“सुबह ए बनारस” में हुआ डॉ. इन्दु जैन राष्ट्र गौरव का सम्मान

नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के करकमलों से दिल्ली में सम्पन्न हुए, नवीन संसद भवन के भूमि…

परमेष्ठी के जन्मोत्सव को अवतरण दिवस मानना कितना उचित ?

आजकल मुनिराजों, आचार्यों, भगवंतों के जन्म दिवस को अवतरण दिवस, जन्म जयंती आदि विभिन्न संज्ञाओं से पुकारा जा रहा है।…

कोरोना से साधू संतों को बचाने हेतु संगोष्ठी का आयोजन

रामदेव बाबा सहित अनेक आयुर्वेदाचार्य होंगे सम्मिलित कोरोना का संक्रमण पूरे देश में तेजी से बढ रहा है, ऐसे में…

जिन प्रभु का अतिशय

चोर कहीं भी ले जाए, प्रतिमा वापस मन्दिर जी में लौट आए दो से तीन बार चोरी हुई प्रतिमा को…

समाज हित में श्री समाज का ऐतिहासिक फैसला

हुमड़पुरम में खुलेगा कोविड आइसोलेशन सेंटर वरिष्ठ जनों की बैठक में हुआ फैसला श्री समाज के वरिष्ठजनों की बैठक समाज…

लोभ को त्यागकर मन की पवित्रता से नाता जोड़िए-मन निर्लोभी, तन निरोगी

  उत्तम शौच धर्म ‘शुचेर्भाव: शौचम’ परिणामों की पवित्रता को शौच कहते हैं। यह परिणाम की पवित्रता अलोभ से आती…

‘शौच पावन गंगा है, गंदा नाला नहीं, मोक्ष द्वार की चाबी है, अवरोधक ताला नहीं’

  उत्तम शौच उत्तम शौच का अर्थ है, लोभ कषाय का नाश करना। जीवन लोभ या लालच से मलिन है…

‘मन की कुटिलता को जड़ से खत्म करता है उत्तम आर्जव धर्म’

‘ऋजोर्भाव: इति आर्जव: अर्थात आत्मा का स्वभाव ही सरल स्वभाव है इसलिए प्रत्येक प्राणी को सरल स्वभाव रखना चाहिए। आत्मा…

‘आर्जव सीधा बांस है उसकी टेड़ी जड़ नहीं’

#उत्तम आर्जव धर्म:  जो न कुटिल चिंतन करता है न शरीर से कुटिलता करता है, न कुटिलत बोलता है और…
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