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By- जिनागम - धर्मसार
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By- जिनागम - धर्मसार
बड़ी खबरें
By- जिनागम - धर्मसार
05/01/2021
“सुबह ए बनारस” में हुआ डॉ. इन्दु जैन राष्ट्र गौरव का सम्मान
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के करकमलों से दिल्ली में सम्पन्न हुए, नवीन संसद भवन के भूमि…
जिनवाणी
By- जिनागम - धर्मसार
31/10/2020
परमेष्ठी के जन्मोत्सव को अवतरण दिवस मानना कितना उचित ?
आजकल मुनिराजों, आचार्यों, भगवंतों के जन्म दिवस को अवतरण दिवस, जन्म जयंती आदि विभिन्न संज्ञाओं से पुकारा जा रहा है।…
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By- जिनागम - धर्मसार
01/10/2020
अंतर्मना
बड़ी खबरें
By- जिनागम - धर्मसार
01/10/2020
कोरोना से साधू संतों को बचाने हेतु संगोष्ठी का आयोजन
रामदेव बाबा सहित अनेक आयुर्वेदाचार्य होंगे सम्मिलित कोरोना का संक्रमण पूरे देश में तेजी से बढ रहा है, ऐसे में…
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By- जिनागम - धर्मसार
29/09/2020
जिन प्रभु का अतिशय
चोर कहीं भी ले जाए, प्रतिमा वापस मन्दिर जी में लौट आए दो से तीन बार चोरी हुई प्रतिमा को…
जिनवाणी
By- जिनागम - धर्मसार
11/09/2020
समाज हित में श्री समाज का ऐतिहासिक फैसला
हुमड़पुरम में खुलेगा कोविड आइसोलेशन सेंटर वरिष्ठ जनों की बैठक में हुआ फैसला श्री समाज के वरिष्ठजनों की बैठक समाज…
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By- जिनागम - धर्मसार
26/08/2020
लोभ को त्यागकर मन की पवित्रता से नाता जोड़िए-मन निर्लोभी, तन निरोगी
उत्तम शौच धर्म ‘शुचेर्भाव: शौचम’ परिणामों की पवित्रता को शौच कहते हैं। यह परिणाम की पवित्रता अलोभ से आती…
जिनवाणी
By- जिनागम - धर्मसार
26/08/2020
‘शौच पावन गंगा है, गंदा नाला नहीं, मोक्ष द्वार की चाबी है, अवरोधक ताला नहीं’
उत्तम शौच उत्तम शौच का अर्थ है, लोभ कषाय का नाश करना। जीवन लोभ या लालच से मलिन है…
लेख/साहित्य/विचार
By- जिनागम - धर्मसार
25/08/2020
‘मन की कुटिलता को जड़ से खत्म करता है उत्तम आर्जव धर्म’
‘ऋजोर्भाव: इति आर्जव: अर्थात आत्मा का स्वभाव ही सरल स्वभाव है इसलिए प्रत्येक प्राणी को सरल स्वभाव रखना चाहिए। आत्मा…
जिनवाणी
By- जिनागम - धर्मसार
25/08/2020
‘आर्जव सीधा बांस है उसकी टेड़ी जड़ नहीं’
#उत्तम आर्जव धर्म: जो न कुटिल चिंतन करता है न शरीर से कुटिलता करता है, न कुटिलत बोलता है और…
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