जिनागम  |  धर्मसार

By- जिनागम - धर्मसार

‘मार्दव द्वार है दीवार नहीं, मार्दव समर्पण है हार नहीं’

उत्तम मार्दव धर्म मृदुता का जो भाव है उसको मार्दव धर्म कहते हैं। अथवा मान का परिहार करना, अहंकार का…

अन्तर्मना उवाच

·         माणं विणयं नासणो-मान विनय का नाश करती है। ·         उत्तम मार्दव  यानि मार दो ,मै और मेरे अहंकार को।…

क्षमा फूल है कांटा नहीं, क्षमा प्यार है चांटा नहीं: उत्तम क्षमा

उत्तम क्षमा धर्म – क्ष= पृथ्वी / पृथ्वी जैसे सहन करती है, उसी प्रकार समता स्वभाव से दूसरों के क्रोध…

घर घर अनादि निधन “महामंत्र णमोकार” का मंगल पाठ आयोजित

घर घर अनादि निधन “महामंत्र णमोकार” का मंगल पाठ आयोजित डिमापुर दिगम्बर जैन समाज के प्रतिष्ठित श्री रवि सेठी सुपुत्र…

श्रावक के अष्ट मूलगुण

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भरतेश वैभव

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वर्तमान में  दिगम्बर जैन संतो/साध्वियो के विराजमान/प्रवासरत स्थानों की जानकारी

👉 आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज (ससंघ) – रेवती रेंज, इंदौर (म.प्र.)   👉 आचार्य श्री 108 कुंथुसागर जी…
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